
*कक्षा से करियर तक, युवाओं के भविष्य के लिए एसआरएचयू में जुटे 70 से अधिक प्रिंसिपल*
*-“शेपिंग टुमॉरो बिगिन्स टुडे’ थीम पर ‘प्रिंसिपल कॉन्क्लेव’ में स्कूल से विश्वविद्यालय तक विद्यार्थियों की यात्रा को बेहतर बनाने पर संवाद*
*–एसएमएस की पहल पर आयोजित कॉन्क्लेव में ‘लाइफ का कंपस’ की सोच के अनुरूप विद्यार्थियों को सही दिशा देने वाली शिक्षा पर जोर*
भास्कर इंडिया लाइव
डोईवाला- स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एसएमएस) की पहल पर ‘प्रिंसिपल कॉन्क्लेव-2026’ का आयोजन किया गया। “शेपिंग टुमॉरो बिगिन्स टुडे’’ (भविष्य का निर्माण आज से शुरू होता है) थीम पर आयोजित कॉन्क्लेव में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से 70 से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षाविद शामिल हुए। शिक्षा के बदलते स्वरूप, विद्यार्थियों की नई जरूरतों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) व स्कूल और विश्वविद्यालय के बीच बेहतर समन्वय पर विचार-विमर्श किया गया।
कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में निदेशक माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखंड विनोद प्रसाद सेमल्टी मुख्य अतिथि तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी, देहरादून गोविंद राम जायसवाल विशिष्ट अतिथि रहे। एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा एवं कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल सहित शिक्षा जगत के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस दौरान डॉ.विजेंद्र चौहान, ए.पी. पारिगी, एसएमएस की निदेशक डॉ. तरुणा गौतम, प्रिसिंपल डॉ.ऋत्विक दूबे भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ.अपूर्व त्रिवेदी व डॉ.श्वेता सेठी ने किया।
*स्कूल से यूनिवर्सिटी तक बेहतर हो संवाद*
कॉन्क्लेव में आयोजित दो पैनल डिस्कशन में विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षा विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के समग्र विकास, करियर मार्गदर्शन, कौशल विकास और भविष्य की शिक्षा व्यवस्था पर अपने विचार साझा किए। चर्चा में स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच निरंतर संवाद एवं सहयोग को विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
एसआरएचयू की ‘लाइफ का कंपस सोच को केंद्र में रखते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी रुचि, क्षमता और जीवन के उद्देश्य के अनुरूप सही दिशा चुनने में सक्षम बनाए।
*“शेपिंग टुमॉरो बिगिन्स टुडे’’ का संदेश*
कॉन्क्लेव में इस बात पर सहमति बनी कि भविष्य की शिक्षा विद्यार्थियों को बदलती दुनिया के लिए तैयार करने वाली होनी चाहिए। स्कूल और विश्वविद्यालय के बीच मजबूत साझेदारी से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, करियर और कौशल के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
एसएमएस निदेशक डॉ.तरुणा गौतम ने कहा कि एसआरएचयू की इस पहल ने प्रदेशभर के स्कूल नेतृत्व और उच्च शिक्षा जगत को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां आज की शिक्षा के माध्यम से कल के बेहतर भविष्य की दिशा तय करने पर सार्थक संवाद हुआ।
*विनोद प्रसाद सेमल्टी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखंड-*
“स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल समय की आवश्यकता है। ऐसे मंच विद्यार्थियों के हित में नई संभावनाओं और सहयोग के रास्ते खोलते हैं।”
*डॉ. विजय धस्माणा, अध्यक्ष, एसआरएचयू-*
“स्कूल और विश्वविद्यालय के बीच मजबूत समन्वय से विद्यार्थियों को बेहतर अवसर और सही मार्गदर्शन मिल सकता है। ऐसे संवाद भविष्य की शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
*गोविंद राम जायसवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी, देहरादून-*
“बदलते समय के साथ शिक्षा में भी नए दृष्टिकोण और कौशल को शामिल करना जरूरी है। स्कूल और विश्वविद्यालय मिलकर विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार कर सकते हैं।”
*डॉ. राजेंद्र डोभाल, कुलपति, एसआरएचयू*
“आज की शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। स्कूलों के साथ साझेदारी से हम विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा को और बेहतर दिशा दे सकते हैं।”
*एपी परिगी, सलाहाकार-* “शिक्षा में तकनीक का उचित और प्रभावी उपयोग ही शैक्षिक गुणवत्ता के नए मानक स्थापित कर सकता है। तकनीक को विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और अनुभव बेहतर बनाने का माध्यम बनाना होगा।”



