
जहां गणपति विराजते हैं, वहां खुशियां खुद चली आती हैं…
गणेश चतुर्थी विशेष : प्रथम पूज्य भगवान गणेश से जुड़ी आस्था, परंपरा और जीवन का संदेश
“गणपति बप्पा मोरया… मंगल मूर्ति मोरया…”
भास्कर इंडिया लाइव
ढोल की थाप, शंख की गूंज, फूलों की खुशबू और श्रद्धा से जुड़े हजारों हाथ… गणेश चतुर्थी आते ही वातावरण में एक अलग ही उत्साह दिखाई देने लगता है। घर हो या मंदिर, छोटा पंडाल हो या भव्य आयोजन—हर जगह भगवान गणेश के स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
लेकिन गणेश चतुर्थी केवल भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने और पूजा-अर्चना करने का पर्व नहीं है। यह नई शुरुआत, बुद्धि, विवेक, समृद्धि और विघ्नों पर विजय का संदेश देने वाला पर्व है।
क्यों सबसे पहले पूजे जाते हैं गणेश जी?
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। उन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
भगवान गणेश का स्वरूप भी अपने आप में जीवन की बड़ी सीख देता है। उनका बड़ा सिर हमें बड़ा सोचने की प्रेरणा देता है, बड़े कान अधिक सुनने का संदेश देते हैं, छोटी आंखें एकाग्रता सिखाती हैं और छोटी मुखाकृति कम बोलने की सीख देती है।
उनका वाहन मूषक यह संदेश देता है कि मनुष्य को अपनी इच्छाओं और अहंकार पर नियंत्रण रखना चाहिए।
मां पार्वती के लाल, हर दिल के गणपति
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं। गणेश जी की बाल लीलाओं से लेकर उनके बुद्धि और विवेक के प्रसंग आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
सबसे प्रसिद्ध प्रसंगों में एक वह है जब भगवान शिव ने गणेश और कार्तिकेय से संसार की परिक्रमा करने को कहा। कार्तिकेय अपने वाहन पर संसार की यात्रा के लिए निकल पड़े, जबकि गणेश जी ने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा कर कहा कि मेरे लिए माता-पिता ही पूरा संसार हैं।
उनकी बुद्धिमत्ता देखकर भगवान शिव ने गणेश जी को प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया।
आज के समय में गणेश चतुर्थी का संदेश
आज जब जीवन भागदौड़, तनाव और प्रतिस्पर्धा से भरा हुआ है, गणेश चतुर्थी हमें कुछ पल ठहरकर अपने भीतर झांकने का अवसर देती है।
यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सफलता केवल धन या पद से नहीं, बल्कि बुद्धि, विनम्रता और अच्छे आचरण से मिलती है।
गणपति की पूजा करते समय यदि हम उनके गुणों को अपने जीवन में उतार लें, तो यही इस पर्व की सबसे बड़ी सार्थकता होगी।

मिट्टी के गणेश, प्रकृति के गणेश
गणेश उत्सव के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जुड़ना चाहिए। आज आवश्यकता है कि अधिक से अधिक लोग प्राकृतिक मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाएं और विसर्जन के दौरान नदियों, तालाबों तथा जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाएं।
आस्था तभी सुंदर है, जब उसके साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी हो।
गणपति बप्पा से यही प्रार्थना…
हे विघ्नहर्ता गणेश!
हमारे जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर करें।
हमारे विचारों में विवेक दें।
हमारे कर्मों में ईमानदारी दें।
हमारे परिवार में सुख-शांति दें।
और समाज में प्रेम, भाईचारा एवं सद्भाव बनाए रखें।
इस गणेश चतुर्थी आइए, केवल घर में गणपति की स्थापना न करें, बल्कि उनके आदर्शों को अपने हृदय में भी स्थापित करें।
गणपति बप्पा मोरया!
मंगल मूर्ति मोरया!
अगले बरस तू



