
एकत्व, सद्भाव और सेवा का अमर प्रकाश: बाबा हरदेव सिंह को नमन
समर्पण दिवस पर संत निरंकारी परिवार ने प्रेम, मानवता और आध्यात्मिक चेतना के आदर्शों को किया भावपूर्ण स्मरण
डोईवाला – प्रेम, करुणा और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक हृदय सम्राट बाबा हरदेव सिंह जी की पावन स्मृति में ‘समर्पण दिवस’ श्रद्धा एवं भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। मुख्य कार्यक्रम संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा (हरियाणा) में आयोजित हुआ, जबकि ऋषिकेश की गंगा नगर ब्रांच में देहरादून से पधारी ज्ञान प्रचारक गीता भट्ट ने सतगुरु का संदेश प्रदान किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि बाबा हरदेव सिंह जी केवल आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि मानवता के सच्चे मार्गदर्शक थे। उनकी सादगी, विनम्रता और करुणामयी वाणी ने समाज को आत्मज्ञान, प्रेम और सहअस्तित्व का मार्ग दिखाया। उन्होंने जीवन भर यही संदेश दिया कि ईश्वर की सच्ची भक्ति मानव सेवा से ही पूर्ण होती है।
उनके दिव्य नेतृत्व में संत निरंकारी मिशन ने आध्यात्मिकता को समाज सेवा से जोड़ते हुए रक्तदान, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, वृक्षारोपण और महिला सशक्तिकरण जैसे अनेक जनकल्याणकारी कार्यों को गति दी। लगभग 36 वर्षों तक मिशन का नेतृत्व करते हुए उन्होंने इसे वैश्विक पहचान दिलाई और आज मिशन 67 से अधिक देशों में मानवता का संदेश प्रसारित कर रहा है।
बाबा जी के “एक को जानो, एक को मानो, एक हो जाओ” और “वसुधैव कुटुम्बकम” जैसे विचार आज भी विश्व बंधुत्व और सद्भाव की प्रेरणा हैं। वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रेम, सेवा और संयम के संदेश को जन-जन तक पहुँचा रही हैं।
समर्पण दिवस इस बात का स्मरण कराता है कि महान आत्माएँ अपने आदर्शों और कर्मों से सदैव जीवित रहती हैं और मानवता को सही दिशा प्रदान करती रहती हैं।



