
*मोदी सरकार का स्वच्छता मॉडल बना सुशासन की नई पहचान : त्रिवेन्द्र*
भास्कर इंडिया लाइव
देहरादून / नई दिल्ली-चमन लाल 06.8.2026
सांसद हरिद्वार एवम् पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए स्वच्छता प्रोत्साहन, स्वच्छ सर्वेक्षण तथा ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) 2.0 के तहत किए जा रहे व्यापक प्रयासों की जानकारी दी।
आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत देश के शहरी क्षेत्रों को ‘गार्बेज फ्री सिटी’ बनाने के लक्ष्य के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण, पुराने डंपसाइटों के सुधार तथा प्रयुक्त जल प्रबंधन पर व्यापक कार्य किया जा रहा है। मिशन के लिए 1.41 लाख करोड़ रुपये का कुल वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है, जिसमें 36,465 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मिशन के तहत नगर निकायों को सामग्री रिकवरी केंद्र (एमआरएफ), बायो-मिथेनेशन संयंत्र, वेस्ट-टू-कम्पोस्ट, वेस्ट-टू-एनर्जी, सी एंड डी वेस्ट प्लांट, सीबीजी संयंत्र तथा अन्य आधुनिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना के निर्माण के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, एक लाख से कम आबादी वाले शहरी निकायों को सीवेज शोधन संयंत्र एवं प्रयुक्त जल प्रबंधन परियोजनाओं के लिए भी सहायता प्रदान की जा रही है।
आगे उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2016 से आयोजित स्वच्छ सर्वेक्षण ने देशभर के शहरों के बीच स्वच्छता को लेकर सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार किया है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाता है, जिससे नगर निकायों को स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
ड्रोन आधारित निगरानी के संबंध में सरकार ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता राज्य का विषय है और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग का निर्णय संबंधित राज्य सरकारों एवं शहरी स्थानीय निकायों द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार लिया जाता है।
सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जनभागीदारी, तकनीक, पारदर्शिता और परिणाम आधारित सुशासन का राष्ट्रीय अभियान बन चुका है। स्वच्छ सर्वेक्षण ने देश के शहरों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा की है, जिससे नागरिक सुविधाओं, कचरा प्रबंधन और शहरी जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में स्वच्छ और आधुनिक शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।



