
साहित्य समाज की चेतना का सशक्त दर्पण : प्रो. (डॉ.) शैलेंद्र हांडू
‘साईं सृजन पटल’ के 24वें द्विवार्षिक विशेषांक का भव्य विमोचन
भास्कर इंडिया लाइव
ऋषिकेश। साहित्य समाज की चेतना, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सशक्त दर्पण है। तकनीकी युग में साहित्य की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है, क्योंकि यह समाज में सकारात्मक सोच और रचनात्मक चिंतन को दिशा देने का कार्य करता है। यह बात एम्स ऋषिकेश के डीन रिसर्च एवं औषधि विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शैलेंद्र हांडू ने ‘साईं सृजन पटल’ मासिक पत्रिका के 24वें द्विवार्षिक विशेषांक के विमोचन समारोह में कही।
ऋषिकेश में आयोजित समारोह में प्रो. (डॉ.) शैलेंद्र हांडू ने पत्रिका के नवीन अंक का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर साहित्यकारों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, शोधार्थियों, छात्र-छात्राओं एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) हांडू ने कहा कि साहित्य महज शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, विचारों और सांस्कृतिक विरासत को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक पत्रिकाएँ नई प्रतिभाओं को मंच देने के साथ ही समाज में सकारात्मक विचारों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने ‘साईं सृजन पटल’ द्वारा साहित्य, संस्कृति, शिक्षा एवं सामाजिक चेतना के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे अनुकरणीय पहल बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ‘साईं सृजन पटल’ के संस्थापक एवं संपादक प्रो. (डॉ.) के. एल. तलवाड़ ने कहा कि पत्रिका का उद्देश्य केवल साहित्यिक रचनाओं का प्रकाशन करना नहीं, बल्कि समाज में रचनात्मक चिंतन, सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि 24वें विशेषांक में साहित्यिक रचनाओं के साथ समसामयिक विषयों, सामाजिक सरोकारों, प्रेरक लेखों और विभिन्न महत्वपूर्ण विमर्शों को स्थान दिया गया है।
उन्होंने पत्रिका की निरंतर यात्रा में सहयोग देने वाले सभी लेखकों, पाठकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और सहभागिता से ‘साईं सृजन पटल’ लगातार नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।
पत्रिका के उपसंपादक अंकित तिवारी ने कहा कि ‘साईं सृजन पटल’ देशभर के साहित्यकारों, शिक्षकों, शोधार्थियों और युवा रचनाकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने का निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रिका का प्रत्येक अंक भारतीय संस्कृति के संरक्षण, सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन और नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की भावना से प्रकाशित किया जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि 24वाँ विशेषांक भी पाठकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा और साहित्यिक जगत में सार्थक संवाद को नई दिशा प्रदान करेगा।
समारोह के अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने पत्रिका के नवीन विशेषांक की सराहना करते हुए इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर चिकित्सकों, शोधार्थियों, साहित्यकारों तथा छात्र-छात्राओं सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।



