
धनतेरस: समृद्धि, आरोग्य और शुभता का पर्व, सदियों पुरानी है परंपरा
भास्कर इंडिया लाइव
देहरादून डोईवाला चमनलाल /विक्रांत वर्मा।
भारत की सनातन संस्कृति में त्योहार केवल उत्सव मनाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे जीवन को नई दिशा देने, परंपराओं को जीवित रखने और समाज में सुख-समृद्धि का संदेश देने का अवसर भी हैं। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का शुभारंभ धनतेरस से होता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व धन, वैभव, आरोग्य और मंगलकामना का प्रतीक है।
धनतेरस को धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए यह पर्व केवल धन अर्जित करने का ही नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करने का भी संदेश देता है।
समुद्र मंथन से जुड़ा है ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन से अनेक दिव्य रत्नों और शक्तियों की उत्पत्ति हुई थी। इसी मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए। उनके प्राकट्य को मानव जीवन के लिए आरोग्य और चिकित्सा विज्ञान की अमूल्य देन माना जाता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार धनतेरस की संध्या पर यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाने की परंपरा भी इसी धार्मिक विश्वास से जुड़ी है।
बर्तन और धातु खरीदने की परंपरा
धनतेरस पर सोना, चांदी, तांबा, पीतल और नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य लेकर आती हैं। हालांकि इस परंपरा का वास्तविक संदेश केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार घर में उपयोगी वस्तु लाकर खुशियां बांटना भी इसका हिस्सा है।
मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा
धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। श्रद्धालु अपने घरों और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई कर दीप जलाते हैं तथा धन, व्यापार में उन्नति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। इस दिन घर के दरवाजों पर रंगोली बनाई जाती है और दीपों से घर को सजाया जाता है।
समृद्धि के साथ स्वास्थ्य का संदेश
धनतेरस हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में धन से अधिक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य है। धन-संपत्ति तभी सार्थक है, जब व्यक्ति स्वस्थ और प्रसन्न रहे। भगवान धन्वंतरि की आराधना हमें निरोगी जीवन, संयमित दिनचर्या और आयुर्वेद के महत्व का स्मरण कराती है।
आज के आधुनिक दौर में धनतेरस का पर्व हमें अपनी प्राचीन संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं से जुड़ने का अवसर देता है। दीपों की रोशनी, पूजा की श्रद्धा और अपनों के साथ खुशियां बांटने का यह पर्व हर घर में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का उजाला फैलाए, यही धनतेरस का वास्तविक संदेश है।



