
ममता, सेवा और करुणा की मिसाल थीं मदर टेरेसा
26 अगस्त को जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि
भास्कर इंडिया लाइ
देहरादून चमन लाल।
मानव सेवा को ही अपना जीवन समर्पित करने वाली महान समाजसेवी मदर टेरेसा की जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। उनका पूरा जीवन गरीबों, असहायों, बीमारों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अपनी करुणा, सादगी और निस्वार्थ सेवा से पूरी दुनिया में मानवता की एक अनूठी मिसाल कायम की।
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे में हुआ था। उनका मूल नाम अंजेज़े गोंझे बोजाजियू था। बाद में उन्होंने भारत को अपनी कर्मभूमि बनाया और कोलकाता में जरूरतमंदों की सेवा का व्यापक कार्य शुरू किया। वर्ष 1950 में उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की, जिसके माध्यम से गरीबों, अनाथों, बीमारों और बेसहारा लोगों की सेवा का सिलसिला आगे बढ़ा।
मदर टेरेसा का मानना था कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने अपना जीवन उन लोगों के लिए समर्पित किया, जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है। उनकी सेवा और समर्पण ने उन्हें विश्वभर में सम्मान दिलाया। उन्हें वर्ष 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने भी वर्ष 1980 में भारत रत्न देकर उनके योगदान को सम्मानित किया
0 मदर टेरेसा का जीवन आज भी समाज को प्रेम, दया, करुणा और निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा देता है। उनकी जयंती पर उन्हें शत-शत नमन करते हुए यह संकल्प लेने की जरूरत है कि हम अपने आसपास जरूरतमंद लोगों की मदद करें और मानवता के प्रति अपने दायित्व को निभाएं।
मदर टेरेसा की सेवा-भावना का संदेश आज भी यही है—मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं और जरूरतमंद की मदद से बड़ी कोई सेवा नहीं।



