
रक्षाबंधन: भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में प्रेम, विश्वास और रक्षा का संकल्प
भास्कर इंडिया लाइव
विशेष लेख | रक्षाबंधन
देहरादून डोईवाला चमन लाल।
भारत त्योहारों और परंपराओं की विविधता वाला देश है। यहां हर पर्व अपने साथ कोई न कोई सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश लेकर आता है। इन्हीं पर्वों में रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व आज केवल राखी बांधने और उपहार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी बन गया है।
‘रक्षा बंधन’ का अर्थ क्या है?

‘रक्षा बंधन’ दो शब्दों से मिलकर बना है—‘रक्षा’ अर्थात सुरक्षा और ‘बंधन’ अर्थात संबंध या जुड़ाव। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधकर उसके सुख, समृद्धि, स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है।
भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार भी रक्षाबंधन का मूल भाव ‘रक्षा के बंधन’ से जुड़ा है और यह पर्व भाई-बहन के स्नेह एवं शुभकामनाओं का प्रतीक है।
कब से मनाया जा रहा है रक्षाबंधन?
रक्षाबंधन की शुरुआत कब और किस वर्ष हुई, इसका कोई एक निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसकी परंपरा प्राचीन भारतीय धार्मिक एवं लोक परंपराओं से जुड़ी मानी जाती है। प्राचीन ग्रंथों में ‘रक्षा सूत्र’ बांधने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। समय के साथ इस परंपरा का स्वरूप बदलता गया और भाई-बहन के प्रेम से जुड़ा रक्षाबंधन इसका सबसे लोकप्रिय रूप बन गया।
रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे प्राचीन धार्मिक कथाओं में भगवान इंद्र और उनकी पत्नी शची की कथा का उल्लेख मिलता है। ‘भविष्य पुराण’ से जुड़ी मान्यता के अनुसार देवासुर संग्राम के समय शची ने इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। इसके बाद रक्षा सूत्र को विजय और संरक्षण के प्रतीक के रूप में देखा गया।
भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कथा
रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कथाओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग भी सुनाया जाता है। मान्यता है कि कृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। इस स्नेह और अपनत्व के बदले कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का संकल्प लिया।
हालांकि, इस कथा को रक्षाबंधन की ऐतिहासिक शुरुआत का प्रमाण मानने के बजाय एक लोकप्रिय धार्मिक-लोक मान्यता के रूप में देखना अधिक उचित है।
माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा
एक अन्य प्रसिद्ध पौराणिक कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और दैत्यराज बलि से संबंधित है। मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु राजा बलि को दिए गए वचन के कारण उनके साथ पाताल लोक में रहने लगे। भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ लाने के लिए माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया। इसके बाद बलि ने माता लक्ष्मी से वर मांगने को कहा और उन्होंने भगवान विष्णु को वैकुंठ लौटने का वर मांगा।
यह कथा भी रक्षाबंधन को केवल भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़ाकर प्रेम, विश्वास और वचनबद्धता से जोड़ती है।
इतिहास में भी रहा है राखी का सामाजिक महत्व
समय के साथ रक्षाबंधन ने धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप भी ग्रहण किया। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान रवींद्रनाथ ठाकुर ने राखी को सामाजिक एकता और भाईचारे के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने लोगों को एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर आपसी एकता और सौहार्द का संदेश देने के लिए प्रेरित किया। इस तरह राखी का धागा सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी बना।
आज के दौर में रक्षाबंधन का संदेश
आज रक्षाबंधन का स्वरूप काफी बदल गया है। बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं, भाई उपहार देते हैं और परिवार एक साथ मिलकर पर्व मनाता है। लेकिन इस उत्सव का वास्तविक महत्व महंगे उपहारों या आकर्षक राखियों में नहीं, बल्कि रिश्तों में छिपे स्नेह और विश्वास में है।
आज जरूरत इस बात की है कि रक्षाबंधन के अवसर पर भाई अपनी बहनों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके सम्मान, अधिकार और आत्मनिर्भरता का भी संकल्प लें। वहीं बहनें भी भाइयों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने का विश्वास दें। यही भावना इस पर्व को और अधिक सार्थक बनाती है।
राखी का धागा केवल कलाई पर नहीं, दिलों में बंधता है।
रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि सच्चे रिश्ते किसी एक दिन के मोहताज नहीं होते। राखी का छोटा-सा धागा भाई-बहन के बीच वर्षों से चले आ रहे प्रेम, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव को फिर से मजबूत करता है। यही कारण है कि बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के बावजूद रक्षाबंधन आज भी भारतीय समाज के सबसे आत्मीय और लोकप्रिय पर्वों में शामिल है।
रक्षाबंधन का संदेश स्पष्ट है—रिश्तों की रक्षा केवल वचन से नहीं, बल्कि जीवनभर प्रेम, सम्मान और साथ निभाने से होती है।



