
विशेष लेख | स्व. रणजीत सिंह वर्मा
डोईवाला की धरती का वह जननेता, जिसने राजनीति से अधिक जनसेवा और उत्तराखंड के लिए संघर्ष को महत्व दिया
भास्कर इंडिया लाइव
डोईवाला/जौलीग्रांट चमन लाल।
उत्तराखंड के इतिहास में 2 सितंबर का दिन एक ओर मसूरी गोलीकांड के शहीदों की स्मृति से जुड़ा है, वहीं इसी दिन उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी और अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा के पूर्व विधायक स्व. रणजीत सिंह वर्मा की पुण्यतिथि भी आती है। उनका जीवन जनसेवा, शिक्षा, किसान हित और पृथक उत्तराखंड राज्य के संघर्ष को समर्पित रहा।
राजनीति में अलग पहचान
स्व. रणजीत सिंह वर्मा का जन्म 4 अक्टूबर 1934 को हुआ था। वे अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने गए। वर्ष 1977 में उन्होंने जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता, जबकि वर्ष 1989 में वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा पहुंचे।
राजनीतिक जीवन
राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल करने के बावजूद वे जमीन से जुड़े रहे। यही वजह थी कि डोईवाला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें एक सहज, सरल और जनसरोकारों से जुड़े नेता के रूप में सम्मान मिला।
किसानों और गन्ना क्षेत्र के मजबूत पैरोकार
डोईवाला क्षेत्र में उनकी पहचान एक प्रगतिशील किसान और गन्ना किसानों के नेता के रूप में भी रही। वे लगभग 25 वर्षों तक डोईवाला गन्ना विकास परिषद के अध्यक्ष रहे। डोईवाला चीनी मिल के पुनर्निर्माण और उसकी पेराई क्षमता बढ़ाने में भी उनके योगदान का उल्लेख मिलता है।
उनकी सोच केवल राजनीति तक सीमित नहीं थी। उनका मानना था कि ग्रामीण क्षेत्र की मजबूती के लिए किसान, शिक्षा और रोजगार—तीनों पर एक साथ काम करना जरूरी है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी अमिट योगदान
डोईवाला में शिक्षा के विस्तार में भी स्व. वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला की प्रबंध समिति से 1966 से 2018 तक जुड़े रहे। उनके लंबे कार्यकाल ने क्षेत्र में शिक्षा के विकास को नई दिशा देने में योगदान दिया।
वर्ष 2005 में दूनघाटी कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन की स्थापना में भी उनकी प्रेरक भूमिका बताई जाती है। इस तरह उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों में भी दिखाई देता है।
उत्तराखंड आंदोलन में निभाई अग्रणी भूमिका
स्व. रणजीत सिंह वर्मा के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन रहा। वे संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष के रूप में आंदोलन को संगठित करने में सक्रिय रहे। डोईवाला सहित आसपास के क्षेत्रों में उन्होंने लोगों को पृथक राज्य की मांग के लिए एकजुट किया।
डोईवाला का प्रेमनगर बाजार आंदोलन के दौरान
उनकी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना। पर्वतीय क्षेत्रों से देहरादून की ओर आने वाले कई आंदोलनकारियों के लिए डोईवाला पड़ाव और संपर्क का महत्वपूर्ण स्थान बना। आंदोलन के दौरान उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और मुजफ्फरनगर कांड में घायल होने के बावजूद उन्होंने संघर्ष जारी रखा।
2 सितंबर 1994 का मसूरी गोलीकांड उत्तराखंड आंदोलन का निर्णायक और दर्दनाक अध्याय बना। आज भी हर वर्ष इस दिन शहीदों के साथ-साथ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्व. रणजीत सिंह वर्मा को श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है।
सादगी और ईमानदारी बनी पहचान
राजनीति में रहते हुए भी उनका जीवन अपेक्षाकृत सादगीपूर्ण रहा। उनके सहयोगियों और उन्हें करीब से जानने वाले लोगों ने उन्हें ईमानदार, सिद्धांतवादी और सकारात्मक राजनीति में विश्वास रखने वाला जननेता बताया है। 2025 में उनकी छठवीं पुण्यतिथि पर डोईवाला में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भी वक्ताओं ने उनके सामाजिक कार्यों और राज्य आंदोलन में योगदान को याद किया।
आज भी याद किया जाता है योगदान
2 सितंबर 2019 को जौलीग्रांट स्थित अस्पताल में उनका निधन हुआ। उनके निधन को डोईवाला क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री सहित अनेक लोगों ने शोक व्यक्त किया था।
स्व. रणजीत सिंह वर्मा का जीवन इस बात की मिसाल है कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ करने का जरिया भी हो सकती है। किसान हित, शिक्षा का प्रसार, सामाजिक सरोकार और पृथक उत्तराखंड के संघर्ष में उनकी भूमिका डोईवाला और उत्तराखंड के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उस संघर्ष, विचार और जनसेवा की भावना को याद करना है, जिसने उत्तराखंड राज्य के निर्माण की नींव को मजबूत किया।
विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏



