
डोईवाला के समर्पित शिक्षक: जिन्होंने शिक्षा को बनाया सेवा और संस्कार का माध्यम
भास्कर इंडिया लाइव
देहरादून डोईवाला विक्रांत वर्मा /चमन लाल। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। डोईवाला क्षेत्र में भी ऐसे अनेक शिक्षक रहे हैं, जिन्होंने अपने समर्पण, अनुशासन और मेहनत से छात्र-छात्राओं के शैक्षिक एवं व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन शिक्षकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के साथ ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
क्षेत्र में शिक्षा के प्रति अपने समर्पण और विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार के लिए विशेष रूप से इन शिक्षकों का योगदान उल्लेखनीय रहा है—
18 वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। अश्विनी कुमार गुप्ता, विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति कर रहे प्रेरित

डोईवाला। डोईवाला नगर की सबसे पुरानी शैक्षिक संस्थाओं में शामिल पब्लिक इंटर कॉलेज में पिछले 18 वर्षों से सहायक अध्यापक (हिंदी) के पद पर सेवाएं दे रहे अश्वनी कुमार गुप्ता उन शिक्षकों में शामिल हैं, जिन्होंने शिक्षण कार्य को केवल नौकरी नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण का माध्यम माना है। अपने लंबे सेवाकाल में उन्होंने विद्यार्थियों को विषय ज्ञान के साथ जीवन में आगे बढ़ने और बेहतर नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया है।
शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने विचार साझा करते हुए अश्वनी कुमार गुप्ता ने कहा कि आज का विद्यार्थी पहले की अपेक्षा अधिक सक्रिय, ऊर्जावान और जागरूक है। अधिकांश विद्यार्थी अपने भविष्य और लक्ष्य को लेकर भी गंभीर हैं। ऐसे में आवश्यकता उन्हें केवल पढ़ाने की नहीं, बल्कि सकारात्मक एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने और सही दिशा में मार्गदर्शन देने की है।
बदलते समय के साथ विद्यार्थियों के सामने आगे बढ़ने के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि शिक्षक प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिभा और रुचि को पहचानें तथा उसकी क्षमता के अनुरूप उसे सही दिशा प्रदान करें। शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने के लिए निरंतर प्रेरित करना भी है।
हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाना जरूरी
अश्वनी कुमार गुप्ता ने कहा कि वर्तमान दौर में विद्यार्थियों के बीच हिंदी भाषा के प्रति घटता लगाव चिंता का विषय है। हिंदी केवल एक विषय नहीं, बल्कि हमारी भाषा, संस्कृति, भावनाओं और अभिव्यक्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ी है। विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि और सम्मान विकसित करने के लिए विद्यालय के साथ-साथ अभिभावकों को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
बच्चों को हिंदी साहित्य, कहानियों, कविताओं और रचनात्मक लेखन से जोड़कर भाषा के प्रति उनकी रुचि बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए शिक्षकों को भी पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के साथ आधुनिक और रचनात्मक तरीकों को अपनाना चाहिए।
शिक्षक दिवस के अवसर पर अश्वनी कुमार गुप्ता जैसे शिक्षकों का योगदान इसलिए विशेष हो जाता है, क्योंकि वे विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने, सही निर्णय लेने, बेहतर नागरिक बनने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए भी तैयार करते हैं। यही एक शिक्षक की वास्तविक भूमिका और उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि हैं।


उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए वर्ष 2018 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आईसीटी के अभिनव प्रयोग के लिए डायट देहरादून ने उन्हें वर्ष 2022 और 2023 में लगातार दो बार सम्मानित किया। वर्ष 2024 में विद्यालय को निपुण विद्यालय पुरस्कार भी मिला।
विद्यालय में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट टीवी और ब्रॉडबैंड की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। वहीं, लोटस पेटल फाउंडेशन के सहयोग से सप्ताह में चार दिन निःशुल्क ऑनलाइन अंग्रेजी कक्षाएं संचालित होती हैं।
स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी विद्यालय ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। वर्ष 2022 में इसे जनपद स्तर का स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार मिला। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और ओहो रेडियो व आकाशवाणी देहरादून के कार्यक्रमों में भी प्रतिभाग किया।
शिक्षा, पर्यावरण, लोक संस्कृति, स्वच्छता और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर योगदान के लिए अरविन्द सिंह सोलंकी को वर्ष 2023 और 2024 में उत्तराखंड गौरव रत्न सम्मान से भी सम्मानित किया गया।
इन शिक्षकों का योगदान केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने छात्र-छात्राओं को मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और लक्ष्य के प्रति समर्पण का महत्व समझाया। यही कारण है कि आज भी उनके पढ़ाए हुए विद्यार्थी उन्हें सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं।
शिक्षक दिवस के अवसर पर ऐसे समर्पित शिक्षकों को याद करना समाज के लिए भी प्रेरणादायी है। डोईवाला क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में इन जैसे शिक्षकों की भूमिका हमेशा याद की जाएगी।



